हज़रत मुहम्‍मद ﷺ कौन हैं? Who is Muhammad PBUH?

हज़रत मुहम्‍मद कौन हैं?
द्वादश्‍यां शुक्‍ल पक्षस्‍य, माधवे मासि माधवम्।
जातो ददृशतुः पुत्रं पितरौ हृष्‍टमानसौ।।
अर्थात – ”जिसके जन्‍म लेने से दुखी मानवता का कल्‍याण होगा, उसका जन्‍म मधुमास के शुक्‍ल पक्ष 
और रबी फसल (रबीउल अव्‍वल) में चन्‍द्रमा की 12वीं तिथि को होगा”
(पुराण, अध्‍याय 2, श्‍लोक 15)

अगर आप लगन की अदभूत शक्ति का अध्‍ययन करना चाहते हैं तो हज़रत मुहम्‍मद की जीवनी पढ़ें.

(नेपोलियन हील, थींक ग्रो एण्‍ड रिच)

“The rise of Islam began. Out of the desert came a flame which would not be extinguished–a democratic army fighting as a unit and prepared to die without wincing. Mohammed had invited the Jews and Christians to join him; for he was not building a new religion. He was calling all who believed in one God to join in a single faith.” – Thomas Surgrue

रेगिस्‍तान के अंदर से एक लौ निकली जो बुझ नहीं पायी, एक प्रजातांत्रिक सेना उभरी जो मिलकर लड़ने और बिना उफ किए मरने के लिए तैयार थी, हज़रत मुहम्‍मद ने यहूदियों और इसाइयों को भी अपने साथ आने के लिए आमंत्रित किया क्‍योंकि वे नया धर्म नहीं बना रहे थे, वे तो सभी को एक ही आस्‍था में करना चाहते थे, उनका एक धर्म में विश्‍वास था.

(थामस स्‍यूग्रू, हेराल्‍ड ट्रिब्‍यून)

हज़रत मुहम्‍मद को नये सिरे से पहचानने की आवश्यकता है।

(कोन्‍टन वेरजेल जोर्जियो)

पांचवी और छठी सदी में इंसानी सभ्‍यता तबाही के दहाने पर खड़ी थी, पिछले चार हजार साल में जो मानव सभ्‍यता बनी थी वो टूट रही थी, सब आपस में लड़ रहे थे, ऐसे समय में अरब में एक मनुष्‍य पैदा हुआ जिसने पूर्वी व पश्चिमी दुनिया को एकता के सूत्र में बांध दिया… वो हज़रत मुहम्‍मद थे।

(जे.एच.डेनिसन, इमोशन्‍स एस दि बेसेसऑफसिविलाइजेशन)

“They would not even accept Mohammed’s innovation of humane warfare. When the armies of the Prophet entered Jerusalem not a single person was killed because of his faith. When the crusaders entered the city, centuries later, not a Moslem man, woman, or child was spared.” – Thomas Surgrue

हज़रत मुहम्मद ने मानवीय युद्ध की माफ करने की नइ अवधारणा दी, जो इसके पहले कहीं सुनी नहीं गइ थी। उन्होने उन मक्कावासीयों को माफ कर दिया जिन लोगों ने उन्हे् सबसे ज्यादा सताया। इसके अलावा जब उनकी सेना येरूसेलम में दाखिल हुइ तो आस्था के नाम पर किसी को कत्ल नहीं किया गया, जबकि बाद में जब ईसाइ फौज येरूसेलम में दाखिल हुइ तो किसी को भी जिंदा नहीं छोड़ा गया।

(थामस स्यूग्रू, हेराल्ड ट्रिब्यून)

आज जो शिक्षा का स्थान विश्वविद्यालय है, वो हज़रत मुहम्मद की ही देन है।

(असद बे)

अगर हज़रत मुहम्मद न होते तो धर्म मठों और जंगलों में सिमटकर रह जाता।

(स्वामी विवेकानंद)

ग्रीक व वैदिक सभ्यता और हज़रत मुहम्मद के विचारों में समानताएं हैं।

(महात्‍मा गांधी)

पोप, पादरी, अन्वेषक और वो सभी लोग जो अफ्रीका में गुलामी का आदेश दिया तथा इसे धर्म के मुताबिक बताया, वो सबके सब गुमनामी के अंधेरे में सो गए। इसके विपरीत हज़रत मुहम्मद हैं जिन्होने इन्सानियत को रंग व नस्ल की जंजीरों से आजादी दी, उनका नाम रौशन होता जा रहा है।

(जी.हिगिन्स, एपोलोजी फार मोहामेट)

“Is the best religion and Muslims are the worst followers.” – George Bernard Shaw

सबसे बेहतरीन धर्म इस्लाम है लेकिन आज मुसलमान सबसे बुरे होते जा रहे हैं।

(बर्नाड शॉ)

हज़रत मुहम्मद के विचार, अख्लाक और रहन सहन, इंसानियत का आश्चर्य है तथा हम यकीन करने पर मजबूर हैं कि उनकी शिक्षा शुद्ध और सच्ची है.

(लियो टालस्टॉय)

अराजकवादी और अय्याश अरबियों के बीच हज़रत मुहम्मद ने गुलामों को भाई का और औरतों को समानता का अधिकार दिया।

(ई.डर्मिंघम, दि लाईफ आफ मोहामेट)

दुनिया में बहुत से धर्म आए और खत्म हो गए, सवाल यह है कि इस्लाम कब तक बाकि रहेगा? इसके जवाब के लिए हज़रत मुहम्मद के व्यक्तित्व को देखा जाए, जब तक इसकी कशिश और असर बाकी रहेगा, इस्लाम बाकि रहेगा।

(जी.डब्यू्मब.लाइट्ज, रिलिजियस सिस्टम आफ दि वर्ल्ड)

हज़रत मुहम्मद से बड़ा इंसान और इंसानियत का पुजारी, दुनिया कभी पैदा न कर सकेगी।

(वाल्टेएयर, फिलासाफी डिक्शनरी)

मुसलमानों की लड़ाइयों और बुराईयों की वजह से हज़रत मुहम्मद से नफरत करना बहुत ही गलत व बदनसीबी की बात है।

(एम.एम.वाट)

हज़रत मुहम्मद ने पूंजीवाद व जातिवाद का अंत करके दुनिया को प्रजातंत्र दिया।

(ई.ब्लाएडन, क्रिश्चियनिटी इस्लाम दी नेग्रो रेस)

हज़रत मुहम्मद को (सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि) पूरी दुनिया के लिए दयावान बनाया गया है।

(कुरआन)­

अगर हज़रत मुहम्मद पूरी दुनिया के सम्राट होते तो इस दुनिया के सारे मसले हल हो चुके होते।

(लियो टालस्टालय)

‘नन्दा! इस संसार में मैं न तो प्रथम बुद्ध हूँ और न तो अन्तिम बुद्ध हूँ। इस जगत में सत्य तथा परोपकारक की शिक्षा देने के लिए अपने समय पर एक और ‘बुद्ध’ आएगा। वह पवित्र अन्तःकरण वाला, शुद्ध हृदय वाला, ज्ञान और बुद्धि से सम्पन्न तथा समस्त लोगों का नायक होगा। जिस प्रकार मैंने जगत् को अनश्वर सत्य की शिक्षा प्रदान की, उसी प्रकार वह भी जगत को सत्य की शिक्षा देगा। जगत् को वह ऐसा जीवन मार्ग दिखाएगा जो शुद्ध व पूर्ण होगा। नन्दा् उसका नाम मैत्रेय होगा।’

(गौतम बुद्ध)

लिंड्गच्‍छेदी शिखाहीनः श्‍माश्रुधारी स दूषकः।
उच्‍चालापी सर्वभक्षी भविष्‍यति जनो मम॥25॥
विना कौलं च पशवस्‍तेषां भक्ष्‍या मता मम।
मुसलेनैव संस्‍कारः कुशैरिव भविष्‍यति॥26॥
तस्‍मान्‍मुसलवन्‍तो हि जातयो धर्मदूषकाः।
इति पैशाचधर्मश्‍च भविष्‍यति मया कृतः॥27॥

(पूराण- भ.पु.पर्व3,खण्‍ड3,अ.1,श्‍लोक25,26,27)

अर्थात, ”हमारे लोगों का खतना होगा, वे शिखाहीन होंगे, वे दाढ़ी रखेंगे, उंचे स्वर में आलाप करेंगे (आजान देंगे) शाकाहारी मांसाहारी (दोनो) होंगे, किन्तु उनके लिए बिना कौल (बिना मंत्र से पवित्र किये यानि हलाल किए) कोई पशु भक्ष्य (खाने) योग्य नहीं होगा। इस प्रकार हमारे मत के अनुसार हमारे अनुयायियों का मुसलैनेव संस्कार होगा। उन्हीं से मुसलवन्त (यानि निष्ठावानों का) धर्म फैलेगा और मेरे कहने से पैशाच धर्म का अंत होगा।


यहां न पक्ष्‍पात कछु राखहुं। वेद, पुराण, संत मत भाखहुं।।
संवत विक्रम दोऊ अनङ्ग। महाकोक नस चतुर्पतङ्ग।।
राजनीति भव प्रीति दिखवै। आपन मत सकमा समझावै।।
सुरन चतुसुदर सतचारी। तिनको वंश भयो अति भारी।।
तब तक सुन्‍दर मद्दिकोया। बिना महामद पार न होया।।
तबसे मानहु जन्‍तु भिखारी। समरथ ना एहि व्रतधारी।।
हर सुन्‍दर निर्माण न होई। तुलसी वचन सत्‍य सच होई।।

(संग्राम पुराण, स्‍कन्‍द, 12, कांड 6 पद्यानुवाद, गोस्‍वामी तुलसीदास)

अर्थात, ”(तुलसीदास जी कहते हैं) मैंने यहां किसी प्रकार का पक्षपात न करते हुए संतो, वेदों और पुराणों के मत को कहा है। सातवीं विक्रमी सदी में चारों सूर्यों के प्रकाश के साथ वह पैदा होगा। राज करने में जैसी परिस्थितियां हों, प्रेम से या सख्‍ती से वह अपना मत सभी को समझा सकेगा। उसके साथ चार देवता (चार खलिफा) होंगे, जिनकी सहायता से उसके अनुयायियों की संख्या काफी हो जाएगी। जब तक सुन्‍दर वाणी (कुरआन) धरती पर रहेगी (उसके) और महामद (हज़रत मुहम्‍म) के बिना मुक्ति नहीं मिलेगी। इन्‍सान, भिखारी, कीड़े-मकोड़े और जानवर (सभी) इस व्रतधारी (रोजे रखनेवाला) का नाम लेते ही ईश्वर के भक्त हो जाएंगे। फिर कोई उसकी तरह का पैदा न होगा, तुलसीदास जी ऐसा कहते हैं कि उनका वचन सत्य सिद्ध होगा।


उष्‍ट्रा यस्‍य प्रवाहिणो वधूमन्‍तों द्विर्दश।
वर्ष्‍मा रथस्‍य नि जिहीडते दिव ईषमाण उपस्‍पृशः।।

(अथर्ववेद कुन्‍ताप सूक्‍त 20/127/2)

अर्थात, ”जिसकी सवारी में दो खूबसूरत उंटनियां हैं। या जो अपनी बारह पत्नियों समेत उंटों पर सवारी करता है, उसकी मान प्रतिष्‍ठा की उंचाई तेज गति से आसमान को छूकर उतरती है।


पहिला नाम खुदा का दूजा नाम रसूल,
तीजा कलमा पढ़ि नानका दरगाह परे कबूल।
दिहटा नूर मुहम्मदी दिहटा नबी रसूल,
नानक कुदरत देखकर सुदी गयो सब भूल।

(गुरू नानक)

वह (हज़रत मुहम्‍मद ) पवित्र आत्‍मा और आज से बपतिस्‍मा देगा।

(बाइबिल, सेण्‍ट मैथ्‍यू 3/11)

वह अन्‍य जाति में आएगा। इसलिए मैं तुम्‍हें कहता हूं कि परमेश्‍वर का राज्‍य तुमसे ले लिया जाएगा और ऐसी जाति को, जो इसका फल लाए, दिया जाएगा।

(बाइबिल, मैथ्‍यू 21,43)

“It was the first religion that preached and practiced democracy” – Sarojini Naidu

ये पहला धर्म है जिसने लोकतंत्र की शिक्षा दी और उसे एक व्‍यवहारिक रूप दिया।

(सरोजनी नायडू)

कहा जाता है कि यूरोप वाले दक्षिणी अफ्रीका में इस्‍लाम के प्रसार से भयभीत हैं, उस इस्‍लाम से, जिसने स्‍पेन को सभ्‍य बनाया, उस इस्‍लाम से जिसने मराकश तक पहुंचाई और संसार को भाई-चारे की इन्‍जील पढ़ाई। दक्षिण अफ्रीका के यूरोपिय इस्‍लाम के फैलाव से बस इसलिए भयभीत हैं कि उसके अनुयायी गोरों के साथ कहीं समानता की मांग न कर बैठें।

(महात्‍मा गांधी)

(Regarding Muhammad) “… a mass of detail in the early sources shows that he was an honest and upright man who had gained the respect and loyalty of others who were likewise honest and upright men.” – Encyclopedia Britannica

समस्‍त पैगम्‍बरों और धार्मिक क्षेत्र के महान व्‍यक्तित्‍वों में हज़रत मुहम्‍मद सब से ज्‍यादा सफल हुए हैं।

(ब्रिटेनिका इन्‍साइक्‍लोपिडिया)

एक नेता के लिए आंदोलनकारी व्‍यक्ति होना बहुत जरूरी है, इसके विपरीत सिद्धांतशास्‍त्री कभी कभार ही नेता बनते हैं। इस धरती पर एक ही व्‍यक्ति है जो सिद्धांतशास्‍त्री भी है, संयोजक भी है और नेता भी, यह दुर्लभ है। वो महान व्‍यक्ति हज़रत मुहम्‍मद हैं।

(मेन कैम्‍प, हिटलर)

वे (हज़रत मुहम्‍मद ) बिना ठाठ-बाठ के सीजर (बादशाह) थे और बिना आडम्‍बर के पोप (धर्मगुरू) थे। उन्‍होने दैवी अधिकार से राज किया।

(बास वर्थ स्मि‍थ)

हां हम में से वे सब जो नैतिक व सदाचारी जीवन व्‍यतीत करते हैं वे सभी इस्‍लाम में ही जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं। यह तो अन्‍ततः वह सर्वोच्‍च ज्ञान एवं प्रज्ञा है जो आकाश से इस धरती पर उतारी गयी है।

(कारलायल)

हमारा पक्का विश्वास है कि व्यावहारिक इस्लाम की मदद लिए बिना वेदांती सिद्धांतचाहे वे कितने ही उत्तम और अद्भुत होंविशाल मानव-जाति के लिए मूल्यहीन (Valueless) हैं…।

टीचिंग्स ऑफ विवेकानंद, पृष्ठ-214, 215, 217, 218) अद्वैत आश्रम, कोलकाता-2004

हज़रत हज़रत मुहम्‍मद कहते हैं कि…

अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है, वह एक ही है, कोई उसका साझी नहीं है।

ईश्वर एक है और सारे इन्सान बराबर हैं।

सारे मनुष्य आदम की संतान हैं और आदम मिट्टी से बनाए गए।

माँ के क़दमों के नीचे जन्नत है।

जिस व्यक्ति के तीन (या तीन से कम भी) बेटियां हों, वह उनकी हत्या न करें, बल्कि उन्हें सप्रेम व स्नेहपूर्वक पाले-पोसे, उन्हें (नेकी, शालीनता, सदाचरण व ईशपरायणता की) उत्तम शिक्षा-दीक्षा दे, बेटों को उन पर प्रमुखता व वरीयता न दे, और अच्छा-सा (नेक) रिश्ता ढूंढ़कर उनका घर बसा दे, जो ऐसा करेगा वह पारलौकिक जीवन में स्वर्ग में मेरे साथ रहेगा।

मर जाओ मरने से पहले।

अल्‍लाह, तुम्‍हारी सूरत या आमाल नहीं देखता बल्कि वो तो तुम्‍हारा दिल और नियत देखता है।

धर्म के मामले में कोई जोर जबरदस्‍ती नहीं हो सकती।

औरतें मर्दों का दूसरा हिस्‍सा है, औरतों के अधिकार का आदर होना चाहिए, इसका ध्‍यान रहे कि आरतें अपने निश्चित अधिकार प्राप्‍त कर पा रहीं या नहीं।

अनाथों के सिर पर हाथ फेरो और भूखों को भोजन खिलाओ। दिल नरम हो जायेगा।

रोज़ा तुम्हारे संपूर्ण शरीर का है, तुम्हारे हृदय का रोज़ा यह है कि उसके अंदर कोई ग़लत भावना न हो। मस्तिष्क से ग़लत न सोचे, आंख गलत चीज़ें न देखे, हाथ से कोई ग़लत काम न करें, ज़बान से कोई ग़लत बात न कहे, पांव किसी गलत जगह एवं ग़लत काम के लिए न उठे। अगर शरीर के किसी अंग का रोज़ा टूटता है तो तुम्हारा रोज़ा पूर्ण नहीं होगा।

कोई मनुष्य उस वक़्त तक मोमिन (सच्चा मुस्लिम) नहीं हो सकता जब तक वह अपने भाई-बन्दों के लिए भी वही न चाहे जो वह अपने लिए चाहता है।

तुममें से सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति वह है जो अपनी पत्नी से अच्छा सुलूक करे।

पत्नी अपने पति के स्थान पर समस्त अधिकारों की मालिक है।

सबसे बड़ा गुनाह अल्लाह के साथ शिर्क और किसी इन्सानी जान को क़त्ल करना है।

 

Hazrat Hazrat Muhammad kaun hain?

dvaadsh‍yaan shuk‍l pkss‍y, maadhve maasi maadhvm.
jaato ddrishtuah putrn pitrau hris‍tmaansau..
yaani – ”jiske jan‍m lene se dukhi manvta ka kal‍yaan hoga, uska jan‍m mdhumaas ke shuk‍l paksh aur rabi fasal (rabiul awwal) men chan‍drma ki 12vin tarikh ko hoga”
(Puraan, adh‍yaay 2, sh‍lok 15)
Agar aap lagan ki adbhut shakti kaa adh‍yayan karna chahte hain to Hazrat Muhammad ki jivni padhen.
(Napoleon Hill – Think and Grow Rich)
Regis‍tan ke andr se ek Lau nikli jo bujh nahin paayi, ek prjatantrik senaa ubhri jo milkr ladene aur binaa uf kie marne ke lie taiyaar thi, Hazrat Muhammad ne yhudiyon aur isaaiyon ko bhi apne saath aane ke liye amantrit kiya k‍yonki ve nayaa dharm nhin banaa rahe the, ve to sabhi ko ek hi aas‍thaa men karna chahte the, unka ek dharm men vish‍vaas thaa.
(Thomas Sugrue Herald Tribune)
Hazrat Muhammad ko naye sire se pahchanne ki zarurat hai.
(Constain Vergel Georgeo)
Panchvi aur chhathi sadi men insaani sabh‍ytaa tabaahi ke dhaane par khadi thi, pichle Chaar hazaar saal men jo maanav sabh‍ytaa bani thi vo tut rahi thi, sab aapas men lad rahe the, aise samay men arab men ek manus‍hya paidaa huaa jisne purvi aur pashchimi duniyaa ko ektaa ke sutr men baandh diyaa… vo Hazrat Muhammad the.
(J.H.Denison, Emotion as the Basis of Civilization)
Hazrat Muhammad ne maanviy yuddh ki maaf krne ki ni avdhaarnaa di, jo iske phle khin suni nhin gai thi. unhone un mkkaavaasiyon ko maaf kr diyaa jin logaon ne unhe sbse jyaadaa staayaa. iske alaavaa jb unki senaa yeruselm men daakhil hui to aas‍thaa ke naam pr kisi ko kt‍l nhin kiyaa gayaa, jbki baad men jb isaai fauj yeruselm men daakhil hui to kisi ko bhi jindaa nhin chodeaa gayaa.
(Thomas Sugrue Herald Tribune)
aaj jo shiksaa kaa s‍thaan vish‍vvidyaaly hai, vo Hazrat Muhammad ki hi den hai.
(Essad Bey)
agar Hazrat Muhammad n hote to dhrm mthon aur jngalon men simtkr rh jaataa.
(Swami Vivekananda)
garik v vaidik sbh‍ytaa aur Hazrat Muhammad ke vikaaron men smaantaaen hain.
(Mahatma Gandhi)
garik v vaidik sbh‍ytaa aur Hazrat Muhammad ke vikaaron men smaantaaen hain.
(Mahatma Gandhi)

pop, paadri, anvesk aur vo sbhi loga jo afrikaa men gaulaami kaa aadesh diyaa tthaa ise dhrm ke mutaabik btaayaa, vo sbke sb gaumnaami ke andhere men so gae. iske viprit Hazrat Muhammad hain jinhone insaaniyt ko rnga v nsl ki jnjiron se aajaadi di, unkaa naam raushn hotaa jaa rhaa hai.
(G. Higgins – Apology for Mohammed)

sbse behtrin dhrm is‍laam hai lekin aaj muslmaan sbse bure hote jaa rhe hain.
(George Bernard Shaw)

Hazrat Muhammad ke vichar, akh‍laak aur rhn shn, insaaniyt kaa aash‍kry hai tthaa hm ykin krne pr mjbur hain ki unki shiksaa shuddh aur sk‍ki hai.
(liyo taals‍toy)

araajkvaadi aur ayyaash arbiyon ke bik Hazrat Muhammad ne gaulaamon ko bhaai kaa aur aurton ko smaantaa kaa adhikaar diyaa.
(i.‍drminghm, di laaif aaf mohaamet)

duniyaa men bhut se dhrm aae aur khtm ho gae, svaal yh hai ki islaam kb tk baaki rhegaaa? iske jvaab ke lie Hazrat Muhammad ke vyktitv ko dekhaa jaae, jb tk iski kshish aur asr baaki rhegaaa, islaam baaki rhegaaa.
(ji.dbyumb.laaitj, rilijiys sis‍tm aaf di vrld)

Hazrat Muhammad se bdeaa insaan aur insaaniyt kaa pujaari, duniyaa kbhi paidaa n kr skegai.
(vaalteeyr, filaasaafi dikshnri)

muslmaanon ki ldeaaiyon aur buraaiyon ki vjh se Hazrat Muhammad se nfrt krnaa bhut hi galt v bdnsibi ki baat hai.
(em.em.vaat)

Hazrat Muhammad ne punjivaad v jaativaad kaa ant krke duniyaa ko prjaatntr diyaa.
(i.blaaedn, krishkiyniti islaam di negaro res)

Hazrat Muhammad ko (sirf muslmaanon ke lie nhin blki) puri duniyaa ke lie dyaavaan bnaayaa gayaa hai.
(kuraan)­

agar Hazrat Muhammad puri duniyaa ke smraat hote to is duniyaa ke saare msle hl ho kuke hote.
(liyo taalstaaly)

‘nndaa! is snsaar men main n to prthm buddh hun aur n to antim buddh hun. is jgat men sty tthaa propkaark ki shiksaa dene ke lie apne smy pr ek aur ‘buddh’ aaegaaa. vh pvitr antahkrn vaalaa, shuddh hridy vaalaa, jnyaan aur buddhi se smpnn tthaa smst logaon kaa naayk hogaaa. jis prkaar mainne jgat ko anshvr sty ki shiksaa prdaan ki, usi prkaar vh bhi jgat ko sty ki shiksaa degaaa. jgat ko vh aisaa jivn maarga dikhaaegaaa jo shuddh v purn hogaaa. nndaa uskaa naam maitrey hogaaa.’
(gaautm buddh)

lindgak‍chedi shikhaahinah sh‍maashrudhaari s duskah.
uk‍kaalaapi srvbhksi bhvis‍yti jno mm
25

vinaa kauln k pshvs‍tesaan bhks‍yaa mtaa mm.
muslenaiv sns‍kaarah kushairiv bhvis‍yti26

ts‍maan‍muslvn‍to hi jaatyo dhrmduskaaah.
iti paishaakdhrmsh‍k bhvis‍yti myaa kritah27
(puraan- bh.pu.prv3,khn‍d3,a.1,sh‍lok25,26,27)

Yaani, ”hmaare logon kaa khtnaa hogaaa, ve shikhaahin hongae, ve daadhei rkhengae, unke s‍vr men aalaap krengae (aajaan dengae) shaakaahaari maansaahaari (dono) hongae, kin‍tu unke lie binaa kaul (binaa mntr se pvitr kiye yaani hlaal kie) koi pshu bhks‍y (khaane) yoga‍y nhin hogaaa. is prkaar hmaare mt ke anusaar hmaare anuyaayiyon kaa muslainev sns‍kaar hogaaa. un‍hin se muslvn‍t (yaani nis‍thaavaanon kaa) dhrm failegaaa aur mere khne se paishaak dhrm kaa ant hogaaa.

yhaan n pks‍paat kchu raakhhun. ved, puraan, snt mt bhaakhhun..
snvt vikrm dooo anngga. mhaakok ns kturptngga..
raajniti bhv priti dikhvai. aapn mt skmaa smjhaavai..
surn ktusudr stkaari. tinko vnsh bhyo ati bhaari..
tb tk sun‍dr mddikoyaa. binaa mhaamd paar n hoyaa..
tbse maanhu jn‍tu bhikhaari. smrth naa ehi vrtdhaari..
hr sun‍dr nirmaan n hoi. tulsi vkn st‍y sk hoi..
(sngaraam puraan, s‍kn‍d, 12, kaand 6 pdyaanuvaad, gaos‍vaami tulsidaas)

Yaani, ”(tulsidaas ji khte hain) mainne yhaan kisi prkaar kaa pkspaat n krte hue snto, vedon aur puraanon ke mt ko khaa hai. saatvin vikrmi sdi men kaaron suryon ke prkaash ke saath vh paidaa hogaaa. raaj krne men jaisi pristhitiyaan hon, prem se yaa skh‍ti se vh apnaa mt sbhi ko smjhaa skegaaa. uske saath kaar devtaa (kaar khlifaa) hongae, jinki shaaytaa se uske anuyaayiyon ki snkh‍yaa kaafi ho jaaegai. jb tk sun‍dr vaani (kuraan) dhrti pr rhegai (uske) aur mhaamd (Hazrat Muhammad ) ke binaa mukti nhin milegai. in‍saan, bhikhaari, kidee-mkodee aur jaanvr (sbhi) is vrtdhaari (roje rkhnevaalaa) kaa naam lete hi ish‍vr ke bhk‍t ho jaaengae. fir koi uski trh kaa paidaa n hogaaa, tulsidaas ji aisaa khte hain ki unkaa vkn sty siddh hogaaa.”
us‍traa ys‍y prvaahino vdhumn‍ton dvirdsh.
vrs‍maa rths‍y ni jihidte div ismaan ups‍prishah..
(athrvved kun‍taap suk‍t 20/127/2)

yaani, ”jiski svaari men do khubsurt untniyaan hain. yaa jo apni baarh ptniyon smet unton pr svaari krtaa hai, uski maan prtis‍thaa ki unkaai tej gati se aasmaan ko chukr utrti hai.”

‘philaa naam khudaa kaa dujaa naam rsul,
tijaa klmaa pdhei naankaa drgaaah pre kbul.
dihtaa nur Muhammadi dihtaa nbi rsul,
naank kudrt dekhkr sudi gayo sb bhul.’
(gauru naank)
voh (Hazrat Muhammad ) pvitr aat‍maa aur aaj se bptis‍maa degaaa.
(baaibil, sen‍t maith‍yu 3/11)

vh an‍y jaati men aaegaaa. islie main tum‍hen khtaa hun ki prmesh‍vr kaa raaj‍y tumse le liyaa jaaegaaa aur aisi jaati ko, jo iskaa fl laae, diyaa jaaegaaa.
(baaibil, maith‍yu 21,43)

ye phlaa dhrm hai jisne loktntr ki shiksaa di aur use ek v‍yvhaarik rup diyaa.
(srojni naaydu)

khaa jaataa hai ki yurop vaale dksini afrikaa men is‍laam ke prsaar se bhybhit hain, us is‍laam se, jisne s‍pen ko sbh‍y bnaayaa, us is‍laam se jisne mraaksh tk phunkaai aur snsaar ko bhaai-kaare ki in‍jil pdheaai. dksin afrikaa ke yuropiy is‍laam ke failaav se bs islie bhybhit hain ki uske anuyaayi gaoron ke saath khin smaantaa ki maanga n kr baithen.
(mhaat‍maa gaaandhi)

sms‍t paigam‍bron aur dhaarmik ksetr ke mhaan v‍yktit‍von men Hazrat Muhammad sb se j‍yaadaa sfl hue hain.
(britenikaa in‍saaik‍lopidiyaa)

ek netaa ke lie aandolnkaari v‍ykti honaa bhut jruri hai, iske viprit siddhaantshaas‍tri kbhi kbhaar hi netaa bnte hain. is dhrti pr ek hi v‍ykti hai jo siddhaantshaas‍tri bhi hai, snyojk bhi hai aur netaa bhi, yh durlbh hai. vo mhaan v‍ykti Hazrat Muhammad hain.
(men kaim‍p, hitlr)

ve (Hazrat Muhammad ) binaa thaath-baath ke sijr (baadshaah) the aur binaa aadm‍br ke pop (dhrmgauru) the. un‍hone daivi adhikaar se raaj kiyaa.
(baas vrth smi‍th)

haan hm men se ve sb jo naitik v sdaakaari jivn v‍ytit krte hain ve sbhi is‍laam men hi jivn v‍ytit kr rhe hain. yh to an‍ttah vh srvok‍k jnyaan evn prjnyaa hai jo aakaash se is dhrti pr utaari gayi hai.
(kaarlaayl)

hmaaraa pkkaa vishvaas hai ki vyaavhaarik islaam ki mdd lie binaa vedaanti siddhaant—kaahe ve kitne hi uttm aur adbhut hon—vishaal maanv-jaati ke lie mulyhin (Valueless) hain….”
—tikingas auf vivekaannd, pristh-214, 215, 217, 218) advait aashrm, kolkaataa-2004

Hazrat Hazrat Muhammad khte hain ki…

Allaah ke sivaa koi pujyniy nahin hai, vh ek hi hai, koi uskaa saajhi nahin hai.
ishvar ek hai aur saare insaan barabr hain.

Saare manushy aadam ki santaan hain aur aadam mitti se banaae gae.

Maan (Mother) ke kadmon ke niche jannat hai.

Jis vyakti ke tin (yaa tin se kam bhi) betiyaan hon, voh unki hatyaa n kren, balki unhen prem va snehpurvak paale-pose, unhen (neki, shaalintaa, sdakarm va ishprayanta ki) uttam shiksaa-diksaa de, beton ko un par pramukhtaa va variytaa na de, aur accha-saa (nek) rishtaa dhundhkar unkaa ghar basaa de, jo aisaa karegaa voh parlaukik jivan men Svarg men Mere Saath rahega.

Mar jaao marne se pahle.

Al‍laah, tum‍hari surat yaa aamaal nhin dekhtaa balki vo to tum‍hara Dil aur Niyat dekhtaa hai.

Dharm ke maamle men koi Zor Jabrdas‍ti nahin ho sakti.

Aurtein Mardon kaa dusraa his‍saa hai, Aurton ke adhikaar ka adar honaa chahiye, iskaa dh‍yaan rahe ki aurtein apne nishchit adhikaar praap‍t kar paa rahin yaa nahin.

Anathon ke sir par haath fero aur bhukhon ko bhojan khilaao. dil narm ho jayega.

Roje tumhaare sanpurn sharir kaa hai, tumhaare hridy kaa roja yeh hai ki uske andar koi galat bhavna na ho. mastisk se galat na soche, aankh galat chijen na dekhe, haath se koi galat kaam na karen, jebaan se koi galat baat na nikle, panv kisi galat jagah aur galat kaam ke liye n uthe. agar sharir ke kisi ang ka roja tut-ta hai to tumhara roja purn nahin hoga.

Koi manusy us vakt tak momin (sachcha muslim) nahin ho saktaa jab tak voh apne bhaai-bandon ke liye bhi vahi na chahe jo voh apne lie chahta hai.

Tum mein se sarvshresth vyakti voh hai jo apni patni se achchaa suluk kare.

Patni apne pati ke sthaan par samast adhikaaron ki maalik hai.

Sabse bada gunah Allaah ke saath shirk aur kisi insaani jaan ko katl karnaa hai.

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