उम्मीद में अपना कुछ नहीं है, कोई आमाल नहीं, कोई घमंड नहीं, जो है उसी का है, बख्‍श दे तो उसकी बख्शिश, रहम कर दे तो उसकी रहमत।

हुज़ूरﷺ फ़रमाते हैं कि ख़ुदा फ़रमाता है. मैं वैसा ही हूं, जैसा मेरा बंदा मेरे बारे में सोचता है। जब…

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