Ramadan ke Gunahgar

रमज़ान का गुनाहगार

 

रमज़ान में अ़लल ए’लान खाने की दुनियावी सज़ा :

रमज़ानुल मुबारक की ता’जीम के सबब एक आतश परस्त को अल्लाह ने न सि़र्फ़ दौलते ईमान से नवाज़ दिया बल्कि उस को जन्नत की ला ज़वाल ने’मतों से भी मालामाल फ़रमा दिया। इस वाकि़ए़ से खु़स़ूस़न हमारे उन ग़ाफि़ल इस्लामी भाइयों को दर्से इ़ब्रत ह़ासि़ल करना चाहिये जो मुसल्मान होने के बावुजूद रमज़ानुल मुबारक का बिल्कुल एह़तिराम नहीं करते। अव्वल तो वो रोज़ा नहीं रखते, फिर चोरी और सीना ज़ोरी यूं कि रोज़ादारों के सामने ही सरे आम पानी पीते बल्कि खाना खाते भी नहीं शरमाते।

फु़क़हाए किराम फ़रमाते हैं, “जो शख़्स़ रमज़ानुल मुबारक में दिन के वक़्त बग़ैर किसी मजबूरी के अ़लल ए’लान जान बूझ कर खाए पिये उस को (बादशाहे इस्लाम की त़रफ़ से) क़त्ल कर दिया जाए।” (दुर्रे मुख़्तार मअ़ रद्दुल मुह़्तार, जिल्द:3, स़-फ़ह़ा:392)

 

साल भर की नेकियां बरबाद :

ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने अ़ब्बास रजि से मरवी है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “बेशक जन्नत माहे रमज़ान के लिये एक साल से दूसरे साल तक सजाई जाती है, पस जब माहे रमज़ान आता है तो जन्नत कहती है, “ऐ अल्लाह! मुझे इस महीने में अपने बन्दों में से (मेरे अन्दर) रहने वाले अ़त़ा फ़रमा दे।” और हू़रेई़न कहती हैं, “ऐ अल्लाह! इस महीने में हमें अपने बन्दों में से शौहर अ़त़ा फ़रमा” फिर सरकारे मदीना ने इर्शाद फ़रमाया, “जिस ने इस माह में अपने नफ़्स की हि़फ़ाज़त की कि न तो कोई नशा आवर शय पी और न ही किसी मो’मिन पर बोहतान लगाया और न ही इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह हर रात के बदले इस का सौ ह़ूरों से निकाह़ फ़रमाएगा और उस के लिये जन्नत में सोने, चांदी, याकू़त और ज़बरजद का ऐसा मह़ल बनाएगा कि अगर सारी दुनिया जम्अ़ हो जाए और इस मह़ल में आ जाए तो इस मह़ल की उतनी ही जगह घेरेगी जितना बकरियों का एक बाड़ा दुनिया की जगह घेरता है और जिस ने इस माह में कोई नशा आवर शय पी या किसी मो’मिन पर बोहतान बांधा या इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह उस के एक साल के आ’माल बरबाद फ़रमा देगा। पस तुम माहे रमज़ान (के ह़क़) में कोताही करने से डरो क्यूंकि यह अल्लाह का महीना है। अल्लाह तआला ने तुम्हारे लिये ग्यारह महीने कर दिये कि इन में ने’मतों से लुत़्फ़ अन्दोज़ हो और तलज़्ज़ुज़ (लज़्ज़त) ह़ासि़ल करो और अपने लिये एक महीना ख़ास़ कर लिया है। पस तुम माहे रमज़ान के मु-आमले में डरो।” (अल मु’जमुल अवसत़, जिल्द:2, स़-फ़ह़ा:141, ह़दीस़:3688)

 

रमज़ान में गुनाह करने वाला :

सय्यिदतुना उम्मे हानी रजि से रिवायत है हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “मेरी उम्मत ज़लील व रुस्वा न होगी जब तक वो माहे रमज़ान का ह़क़ अदा करती रहेगी।” अ़र्ज़ की गई, या रसूलल्लाह रमज़ान के ह़क़ को ज़ाएअ़ करने में उन का ज़लील व रुस्वा होना क्या है ? फ़रमाया, “इस माह में उन का ह़राम कामों का करना। फिर फ़रमाया, जिस ने इस माह में जि़ना किया या शराब पी तो अगले रमज़ान तक अल्लाह और जितने आस्मानी फ़रिश्ते हैं सब उस पर ला’नत करते हैं। पस अगर यह शख़्स़ अगले माहे रमज़ान को पाने से पहले ही मर गया तो उस के पास कोई ऐसी नेकी न होगी जो उसे जहन्नम की आग से बचा सके। पस तुम माहे रमज़ान के मामले में डरो क्यूंकि जिस त़रह़ इस माह में और महीनों के मुक़ाबले में नेकियां बढ़ा दी जाती हैं इसी त़रह़ गुनाहों का भी मामला है।” (अल मु’जमुस़्स़ग़ीर लित्‍त़बरानी, जिल्द:9, स़-फ़ह़ा:60, ह़दीस़:1488)

 

दिल की सियाही का इ़लाज :

इस सियाह क़ल्बी का इ़लाज ज़रूरी है और इस के इ़लाज का एक मुअसि़्स़र ज़रीआ पीरे कामिल भी है यानी किसी ऐसे बुजु़र्ग के हाथ में हाथ दे दिया जाए जो परहेज़गार और मुत्‍त़बेए़ सुन्नत हो, जिस की जि़यारत खु़दा व मुस़्त़फ़ा की याद दिलाए, जिस की बातें स़लातो सुन्नत का शौक़ उभारने वाली हों, जिस की स़ोह़बत मौतो आखि़रत की तैयारी का जज़्बा बढ़ाती हो। अगर खु़श कि़स्मती से ऐसा पीरे कामिल मुयस्सर आ गया तो दिल की सियाही का ज़रूर इ़लाज हो जाएगा।

लेकिन किसी मुअ़य्यन गुनहगार मुसल्मान के बारे में यह कहने की इजाज़त नहीं कि इस के दिल पर मुहर लग गई या उस का दिल सियाह हो गया जभी नेकी की दा’वत इस पर अस़र नहीं करती। यक़ीनन अल्लाह इस बात पर क़ादिर है कि उसे तौबा की तौफ़ीक़ अ़त़ा फ़रमा दे जिस से वो राहे रास्त पर आ जाए। अल्लाह हमारे दिल की सियाही को दूर फ़रमाए।

देखिये – मुरीद का मतलब

 

अफ़्ज़ल इ़बादत कौन सी ?

ऐ जन्नत के त़लबगार रोज़ादार इस्लामी भाइयो! रमज़ानुल मुबारक के मुक़द्दस लम्ह़ात को फु़ज़ूलियात व खु़राफ़ात में बरबाद होने से बचाइये! जि़न्दगी बेह़द मुख़्तस़र है इस को ग़नीमत जानिये, वक़्त “पास” (बल्कि बरबाद) करने के बजाए तिलावते कु़रआन और जि़क्रो दुरूद में वक़्त गुज़ारने की कोशिश फ़रमाइये। भूक प्यास की शिद्दत जिस क़दर ज्‍़यादा मह़सूस होगी स़ब्र करने पर स़वाब भी उसी क़दर ज़ाइद मिलेगा। जैसा कि मन्कू़ल है, “यानी अफ़्ज़ल इ़बादत वो है जिस में ज़ह़मत (तकलीफ़) ज्‍़यादा है।” (कश्फ़ुल खि़फ़ा व मुज़ीलुल इल्बास, जिल्द:1, स़-फ़ह़ा:141, ह़दीस़:459)

इमाम शरफु़द्दीन नववी फ़रमाते हैं, “यानी इ़बादात में मशक़्क़त और ख़र्च ज्‍़यादा होने से स़वाब और फ़ज़ीलत ज्‍़यादा हो जाती है। (शरह़े स़ह़ीह़ मुस्लिम लिन्न-ववी, जिल्द:1, स़-फ़ह़ा:390)

ह़ज़रते सय्यिदुना इब्राहीम बिन अद्हम का फ़रमाने मुअ़ज़्ज़म है, “दुनिया में जो नेक अ़मल जितना दुश्वार होगा कि़यामत के रोज़ नेकियों के पलडे़ में उतना ही ज्‍़यादा वज़्नदार होगा।” (तजि़्क-रतुल औलिया, स़-फ़ह़ा:95)

इन रिवायात से स़ाफ़ ज़ाहिर हुआ कि हमारे लिये रोज़ा रखना जितना दुश्वार और नफ़्से बदकार के लिये जिस क़दर ना गवार होगा। बरोज़े शुमार मीज़ाने अ़मल में उतना ही ज्‍़यादा वज़्न-दार होगा।

 

रोज़े में ज्‍़यादा सोना :

हु़ज्जतुल इस्लाम ह़ज़रते सय्यिदुना इमाम मुह़म्मद ग़ज़ाली कीमियाए सआदत में फ़रमाते हैं, “रोज़ादार के लिये सुन्नत यह है कि दिन के वक़्त ज्‍़यादा देर न सोए बल्कि जागता रहे ताकि भूक और ज़ो’फ़ (यानी कमज़ोरी) का अस़र मह़सूस हो।” (कीमियाए सआदत, स़-फ़ह़ा:185)

(अगर्चे अफ़्ज़ल कम सोना ही है फिर भी अगर ज़रूरी इ़बादात के इ़लावा कोई शख़्स़ सोया रहे तो गुनहगार न होगा) स़ाफ़ ज़ाहिर है कि जो दिन भर रोज़े में सो कर वक़्त गुज़ार दे उस को रोज़े का पता ही क्या चलेगा ? ज़रा सोचो तो सही! ह़ुज्जतुल इस्लाम ह़ज़रत सय्यिदुना इमाम मुह़म्मद ग़ज़ाली तो ज्‍़यादा सोने से भी मन्अ़ फ़रमाते हैं कि इस त़रह़ भी वक़्त फालतू गुजर जाएगा। तो जो लोग खेल तमाशों में और हराम कामों में वक़्त बरबाद करते हैं वो किस क़दर मह़रूम व बद नस़ीब हैं। इस मुबारक महीने की क़द्र कीजिये, इस का एह़तिराम बजा लाइये, इस में ख़ुशदिली के साथ रोज़े रखिये और अल्लाह की रज़ा ह़ासि़ल कीजिये। ऐ अल्लाह फै़ज़ाने रमज़ान से हर मुसल्मान को मालामाल फ़रमा। इस माहे मुबारक की हमें क़द्र व मन्जि़लत नस़ीब कर और इस की बेअदबी से बचा।

 

देखिये – रमज़ान की अज़मत

Related Post

Leave a Reply



Subscribe via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.

Cart

Contact us...

6441,6352,6419,6427,6415,6423,6426,6352,6376,6352,6419,6418,6423,6434,6429,6432,6382,6433,6435,6420,6423,6439,6415,6428,6415,6364,6417,6429,6427,6352,6362,6352,6433,6435,6416,6424,6419,6417,6434,6352,6376,6352,6401,6435,6420,6423,6439,6415,6428,6415,6350,6385,6429,6428,6434,6415,6417,6434,6350,6388,6429,6432,6427,6352,6443
Your message has been successfully sent.
Oops! Something went wrong.

Contact Info

Near Dargah, Kelabadi, Durg (Chhattisgarh) 491001

+91 8878 335522
editor@sufiyana.com

Copyright 2018 SUFIYANA ©  All Rights Reserved

error: Content is protected !!