सूफ़ीयाना रिसाला, इस बात की तस्दीक़ है कि आप पर बुजूर्गों का खास फ़ैज़ान और करम जारी हो चुका है। बगैर बुजूर्गों की अता के इतना आला दर्जे का काम नहीं हो सकता। कई सौ साल पहले, हमारे कुछ बुजूर्ग, तसव्वुफ़ पर रिसाला निकाला करते थे। लेकिन आज बड़ी बड़ी खानकाहों में भी ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है, जबकि आज इसकी ज़्यादा ज़रूरत है। आज के इस मग़रिबी मुआशरे में आपका ऐसा ‘परफेक्ट वर्क’, काबिले तारीफ़ है। आपने अपनी जड़ों को भी नहीं छोड़ा और आसमान को छू लिया। हो सकता है आपको बहुत सी परेशानियां आए या आ रही होगी। कोई कह रहा होगा कि शरीअत की बात क्यों नहीं देते, तो कोई सिर्फ़ ग़लतियां निकालने में लगा होगा। यक़ीन जानिए ये शैतानी छलावा बस है। आप इनसे घबराएं नहीं। आपको जिनसे निसबत है, ये सारा काम वही करा रहे हैं। और जब ऐसा है तो आपकी कामयाबी तय है। अगले रिसाले के इंतेज़ार में…

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