Sufiyana 215

छाप तिलक सब छीनी रे

कलाम – हज़रत अमीर खुसरोؓ

 

उर्दू भाषा की पहली ग़ज़ल लिखनेवाले, हज़रत अमीर खुसरोؓ की तारीफ़ के लिए हमारे पास शब्द नहीं है। 

आप फ़नाइयत में डूबे हुए सूफ़ी हैं। पेश है आपका लिखा हुआ एक मशहूर हिन्दी कलाम...

 

 

छाप तिलक सब छीनी रे

मोसे नैना मिलाइके।

 

प्रेम भटी का मधवा पिलाइके

मतवाली कर दीनी रे

मोसे नैना मिलाइके।

 

गोरी गोरी बय्यां, हरी हरी चूरियां,

बय्यां पकड़ धर लीनी रे

मोसे नैना मिलाइके।

 

बल बल जाउं मैं, तोरे रंग रजवा,

अपनी सी कर लीनी रे

मोसे नैना मिलाइके।

 

‘खुसरो’ निजाम के बल बल जय्ये,

मोहे सुहागन कीनी रे

मोसे नैना मिलाइके।

 

छाप तिलक सब छीनी रे

मोसे नैना मिलाइके।

Sufiyana 133

किरपा करो सरकार…

मैं मली, तन मेरा मैला, किरपा करो सरकार।

नज़रे करम सरकार, या मुहम्मद ﷺ…

सरपे उठाकर पाप की गठरी, आई हूं तुम्हरे द्वार।

नज़रे करम सरकार, या मुहम्मद ﷺ…

 

मेरे खिवइया बीच भंवर में, कश्ती डूब न जाए।

तेरा हूं, तू मेरी खबर ले, कौन लगाए पार।

नज़रे करम सरकार, या मुहम्मद ﷺ…

 

मुझ मंगते की बात ही क्या है, वो हैं बड़े लजपाल।

उनकी किरपा और दया से, पलता है सब संसार।

नज़रे करम सरकार, या मुहम्मद ﷺ…

 

उनकी अता के गुन गाओ, उनसे ही फरियाद करो।

सबसे बड़े दाता हैं वो, सबसे बड़ी सरकार।

नज़रे करम सरकार, या मुहम्मद ﷺ…

 

उनकी याद ईमान बना लो, ख़ुद को ही क़ुरान बना लो।

उनकी याद से मिट जाते हैं, सारे ही आज़ार।

नज़रे करम सरकार, या मुहम्मद ﷺ…

 

उसके लिए तो सरमाया है, प्यारे मदिने वाले का।

सोचें समझें कहने वाले, ‘खालिद’ को नादार।

नज़रे करम सरकार, या मुहम्मद ﷺ…

 

आज़ार=बीमार, सरमाया=असल दौलत, नादार=ग़रीब

 

 

Sufiyana 115

मी रक़्सम

सूफ़ीयाना कलाम

नमी दानम चे आखिर चूं दमे दीदार मी रक्सम

मगर नाज़म बईं ज़ौक़े के पेशे यार मी रक्सम

मुझे नहीं मालूम कि आखिर दीदार के वक्त क्यूं रक्स कर रहा हूं

लेकिन अपने इस ज़ौक़ पर नाज़ है कि अपने यार के सामने रक्स कर रहा हूं

तू आं क़ातिल के अज़ बहरे तमाशा खूने मनरेज़ी

मन आं बिस्मिल के ज़ेरे खंजरे खूंखार मी रक्सम

तू वो क़ातिल है के तमाशे के लिए मेरा खूंन बहाता है

और मैं वो बिस्मिल हूं के खूंखार खंजर के नीचे रक्स करता हूं

सरापा बर सरापाए खुदम अज़ बेखुदी कुरबां

बगिरदे मरकज़े खुद सूरते परकार मी रक्सम

सर से पांव तक जो मेरा हाल है, उस बेखुदी पर मैं कुरबान जाउं,

के परकार की तरह अपने ही इर्द गिर्द रक्स करता हूं

बया जानां तमाशा कुन के दर अन्बूहे जांबजां

बसद सामाने रूसवाई सरे बाज़ार मी रक्सम

आ ऐ महबूब, और तमाशा देख कि जांबजां की भीड़ में,

मैं सैकड़ों रूसवाइयों के सामान के साथ, सरे बाज़ार रक्स करता हूं

खुशा रिन्दी के पामालश कुनम सद पारसाइ रा

ज़हे तक़वा के मन बा जुब्बा ओ दसतार मी रक्सम

वाह मयनोशी, कि जिसके लिए मैंने सैंकड़ों पारसाइयों को पामाल कर दिया

खूब तकवा, कि मैं जुब्बा व दस्तार के साथ रक्स करता हूं

तू हर दम मी सराई नग़मा व हर बार मी रक्सम

बहर तरज़े के रक्सानी मनम ऐ यार मी रक्सम

तू हर वक्त जब भी मुझे नग़मा सुनाता है, मैं हर बार रक्स करता हूं

और जिस धून में रक्स कराता है, ऐ यार, मैं रक्स करता हूं

अगरचे क़तर ए शबनम नपायद बर सरे खारे

मनम आं क़तर ए शबनम बनोके खार मी रक्सम

अगरचे शबनम का क़तरा कांटे पर नहीं पड़ता

लेकिन मैं शबनम का वो क़तरा हूं के कांटे की नोक पर रक्स करता हूं

मनम ‘उसमान हारूनी’ के यारे शैख मन्सूरम

मलामत मी कुनद खल्क़े व मन बरदार मी रक्सम

मैं उस्मान हारूनी रज़ी., शैख मन्सूर हल्लाज रज़ी. का दोस्त हूं,

मुझे खल्क़ मलामत करती है और मैं सूली पर रक्स करता हूं

– कलाम – हज़रत ख्वाजा उसमान हारूनी रज़ी.

(ख्वाजा गरीबनवाज़ रज़ी. के पीरोमुर्शिद)

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Aai Naseem koye Muhammad – Naat

Aai Naseem e koye Muhammad SAW

آئی نسیم کوئے محمد صل اللہ علیہ وسلم

 

Aayee Naseem e Kuye Muhammad by Ustad Nusrat Fateh Ali Khan Qawwal

 
Ayi Nasime Quye Mohammad by Aziz Khan Warsi Qawwal

Aayee Naseeme Kooye Muhammad SAW – by Bilal Qadri Naat

Aayi Naseem-e-Koo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam
KhiNchnay laga di soo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam
آئی نسیم کوئے محمد صل اللہ علیہ وسلم
کھنچنے لگا دل سوئے محمد صل اللہ علیہ وسلم

Kaaba harama Koo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam
Mushaf-e-Iman Roo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam
کعبہ ہمارا کوئے محمد صل اللہ علیہ وسلم
مصحف ایماں روئے محمد صل اللہ علیہ وسلم

Tubah ke jaanib Takney waalo, AaNkhaiN khoalo, hoash sambhaalo
Aanay ko hai ab, koo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam
طوبیٰ کی جانب تکنے والوں آنکھیں کھولو ہوش سنبھالو
دیکھو قد دلجوئے محمد صل اللہ علیہ وسلم
Naam Isi ka Baab-e-karam hai, Dekh yahi Mehrab-e-Karam hai
Dekh Kham Abroo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam

نام اسی کا باب کرم ہے دیکھ یہی محراب حرم ہے
دیکھ خم ابروئے محمد صل اللہ علیہ وسلم

Ham sab ka Qibla, soo-e-Kaaba, Soo-e-Kaaba koo-e-Muhammad
Kaabay ka Kaaba Roo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam
ہم سب کا رخ سوئے کعبہ سوئے محمد روئے کعبہ
کعبے کا کعبہ کوئے محمد صل اللہ علیہ وسلم

Bheenee bheenee Khushboo mehkee, ‘Bedam’ dik kee bagyaaN lahkeeN
Khul gayey jab gaisoo-e-Muhammad, Sal-lal-lahu Alaihi Wa Sallam
بھینی بھینی خوشبو لہکی بیدم دل کی دنیا مہکی
کھل گئے جب گیسوئے محمد صل اللہ علیہ وسلم

– Lyrics-

حضرت بیدم شاہ وارثی رحمت الله عالیہ
Hazrat Bedam Shah Warsi RA

Guftam ke Roshan

Guftam Ke Roshan Az Qamar Gufta Ke Rukhsar e Mast

گفتم کہ روشن از قمر، گفتا کہ رخسار منست

گفتم کہ شیریں از شکر، گفتا کہ گفتار منست

میں نے پوچھاکہ چاند سے زیادہ روشن کوئی ہے،کہا کہ میرا رخسار
پوچھا کہ شکر سے میٹھی کوئی چیز ہے ،کہا کہ میری گفتگو ہے
گفتم طریق عاشقان، گفتا وفا داری بود
گفتم مکن جورو جفا، گفتا کہ ایں کار منست
پوچھا عاشقی کا طریقہ، کہا وفاداری
کہا کہ ظلم و ستم نہ کرنا ، کہا کہ  میرا کام ہے
گفتم کہ مرگ عاشقان ، گفتا کہ درد ہجر من
گفتم کہ علاج زندگی، گفتا کہ دیدار منست
پوچھا کہ عاشق کیسے مرتے ہیں، کہا کہ میرےفراق میں
پوچھا کہ زندگی کا علاج کیا ہے،کہا کہ میرا دیدار ہے
گفتم بہاری یا خزاں ، گفتا کہ رشک حسن من
گفتم خجالت کبک را، گفتا کہ رفتار منست
پوچھا کہ بہار اور خزاں ،کہا کی میرے حسن پر رشک
کہا کہ قمر کی شرمندگی ،کہا کہ میری رفتار ہے
گفتم کہ حوری یا پری، گفتا کہ من شاہ جہاں
گفتم کہ خسرو ناتواں، گفتا کہ پرستار منست
کہا کہ حور ہے کہ پری،کہا میں سارے جہان کا بادشاہ
پوچھا کہ غریب خسرو،کہا کہ میرا پرستار ہے

मुर्शिद से इश्क लड़ा कर तो देखो

मुर्शिद से इश्क लड़ा कर तो देखो

कवि : श्री भूपिंदर सेठी ‘अमन’

मुर्शिद से इश्क लड़ा कर तो देखो
सजदे में सर को झुका कर तो देखो II

बन जायेगा तुम्हारा गम-गुसार ये मुर्शिद,
खुदी इनके आगे मिटा कर तो देखो II

कायल न हो जाओ तो कहना मुझसे,
ज़रा दामन को अपने फैलाकर तो देखो II

हजूम राज़े-हक का उमड़ रहा है सीने में,
ज़रा नजदीक मुर्शिद आ कर तो देखो II

तुमको फरेब की दुनिया से क्या होगा हासिल,
ज़रा मोहब्बत में इनको आजमा कर तो देखो II

जब उल्फत का मसीहा है साथ अपने,
‘अमन’ इन पर अकीदा लाकर तो देखो II

भटकी हुई रूह को भी करार मिलेगा,
बज़्म-ए-मुर्शिद की आ कर तो देखो II

murshid se ishk ldaa kr to dekho
kvi : shri bhupindr sethi ‘amn’

murshid se ishk ldaa kr to dekho

sjde men sr ko jhukaa kr to dekho II

bn jaayegaaa tumhaaraa gam-gausaar ye murshid,

khudi inke aagae mitaa kr to dekho II

kaayl n ho jaao to khnaa mujhse,

jeraa daamn ko apne failaakr to dekho II

hjum raajee-hk kaa umd rhaa hai sine men,

jeraa njdik murshid aa kr to dekho II

tumko freb ki duniyaa se kyaa hogaaa haasil,

jeraa mohbbt men inko aajmaa kr to dekho II

jb ulft kaa msihaa hai saath apne,

‘amn’ in pr akidaa laakr to dekho II

bhtki hui ruh ko bhi kraar milegaaa,

bzm-e-murshid ki aa kr to dekho II

source:http://www.maanavta.com/poems/bhupinder-sethi-aman-delhi/murshad-se-ishq-lada-kar-to-dekho-hindi-poem/

Man Kunto Maula (Sufiyana Kalam)

 मन कुन्‍तो मौला (हजरत अमीर खुसरो र.अ.)

 

मन कुन्‍तो मौला
फअली मौला
दरदिल दरदिल दरदानी
हम तुम तनाना नना
नना नना रे
यालाली यालाली
याला याला याला  
من کنت مولا
 فعلی مولا
 دردل دردل دردانی
 ہم توم تناناننا
 نناننارے 
یالالی یالالی 
یالا یالا یالا رے

Man Kunto Maula
F’ali Un Maula
Dara Dil E Dara Dil E Dar E Dani
Hum Tum Tanana Nana, Tana Nana Ray
Yalali Yalali Yala Yala Ray

 Man Kunto Maula – Various

 

 Man Kunto Maula – Shankar Shambhu

Man Kunto Maula – Nusrat Fateh Ali Khan

Man Kunto Maula – Sabri Brothers

 

 

Man Qunto Maola – Farid Ayaz & Abu Mohammad Qawwal

 

Man Kunto Maula – Ustad Bahauddin Khan/Manzoor Santoo Khan/Asif Ali Khan Qawwal 

 

Man Kunto Maula – Aziz Mian

Man Kunto Maula -Abida Parveen

 

Man Kunto Maula – Ustad Meraj Ahmed Nizami 

 

Man Kunto Maula (Qaol) – Zila Khan 

 

Man kunto Maula (Qaul ) – Ustad Shujaat Hussain Khan 

 

Man Kunto Maula (Qoul) – Ustad Aslam khan Sahab 

संत कबीर के दोहे Saint Kabir ke Dohe

संत कबीर के दोहे Saint Kabir ke Dohe

सतगुरू की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।
लोचन अनंत उघाडिया, अनंत दिखावणहार।।

अन्‍त नहीं सद्गुरू की महिमा का, और अन्‍त नहीं उनके किये उपकारों का,
मेरे अनन्‍त लोचन खोल दिये, जिनसे निरन्‍तर मैं अनन्‍त को देख रहा हूं।

बलिहारी गुर आपणैं, द्यौंहाडी कै बार।
जिनि मानिष तैं देवता, करत न लागी बार।।

हर दिन कितनी बार न्‍यौंछावर करुं अपने आपको सद्गुरू पर,
जिन्‍होने एक पल में ही मुझे मनुष्‍य से परमदेवता बना दिया, और तदाकार हो गया मैं।

गुरू गोविन्‍द दोउ खड़े, काके लागूं पायं।
बलिहारी गुरू आपणे, जिन गोविन्‍द दिया दिखाय।।

गुरू और गोविन्‍द दोनों ही सामने खड़े हैं, दुविधा में पड़ गया हूं कि किसके पैर पकड़ूं।
सदगुरू पर न्‍यौछावर होता हूं कि जिसने गोविन्‍द को सामने खड़ाकर दिया, गोविन्‍द से मिला दिया।

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिा
सब अंधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्‍या माहि।।

जब तक ‘मैं’ था, तब तक ‘वो’ नहीं थे, अब जब ‘वो’ हैं तो ‘मैं’ नहीं रहा।
अंधेरा और उजाला, एक साथ कैसे रह सकता,
फिर वो रौशनी तो मेरे अन्‍दर ही थी।

तुम दीन दयाल हो मनमोहन… Tum Deen Dayal ho Man Mohan…

तुम दीन दयाल हो मनमोहन…

तुम दीनदयाल हो मनमोहन,
या ख्‍वाजा जलालुद्दीन हसन।
बरसाओ जरा किरपा की किरन,
या ख्‍वाजा जलालुद्दीन हसन।

प्रभु ने तुम्‍हें सम्‍मान दिया,
जागीर में हिन्‍दुस्‍तान दिया।
संसार ने वारे तन-मन-धन,
या ख्‍वाजा जलालुद्दीन हसन।

अधिराज हो अंतरयामी हो,
भारत में सबके स्‍वामी हो।
भारत में हो सुख का वातावरण,
या ख्‍वाजा जलालुद्दीन हसन।

जो शीष मुकूट है आला है
लब पर वहदत का तराना है।
नूरानी है मेरा साजन,
या ख्‍वाजा जलालुद्दीन हसन।

तुम ख्‍वाजा हसन के ज्ञानी हो,
हम मंगता हैं तुम दानी हो।
झुके शीष मोरी तुम्‍हरे चरणन,
या ख्‍वाजा जलालुद्दीन हसन।

है तुम्‍हरी दया से ज्ञान मिला,
जो ज्ञान मिला ईमान मिला।
हुए भाग मेरे मुर्शिद धन धन,
या ख्‍वाजा जलालुद्दीन हसन।

Tuma dīna dayāla hō manamōhana…

Tuma dīnadayāla hō manamōhana,
Yā khvājā jalāluddīna hasana.
Barasā’ō jarā kirapā kī kirana,
Yā khvājā jalāluddīna hasana.

Prabhu nē tumhēṁ sam’māna diyā,
Jāgīra mēṁ hindustāna diyā.
Sansāra nē vārē tana-mana-dhana,
Yā khvājā jalāluddīna hasana.

Adhirāja hō antarayāmī hō,
Bhārata mēṁ sabakē svāmī hō.
Bhārata mēṁ hō sukha kā vātāvaraṇa,
Yā khvājā jalāluddīna hasana.

Jō śīṣa mukūṭa hai ālā hai
Laba para vahadata kā tarānā hai.
Nūrānī hai mērā sājana,
Yā khvājā jalāluddīna hasana.

Tuma khvājā hasana kē jñānī hō,
Hama maṅgatā haiṁ tuma dānī hō.
Jhukē śīṣa mōrī tumharē caraṇana,
Yā khvājā jalāluddīna hasana.

Hai tumharī dayā sē jñāna milā,
Jō jñāna milā īmāna milā.
Hu’ē bhāga mērē murśida dhana dhana,
Yā khvājā jalāluddīna hasana.

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