सूफ़ी, सूरज की तरह रौशन होते हैं और सारी दुनिया को रौशन करते हैं।
सूफ़ी, सूरज की तरह रौशन होते हैं और सारी दुनिया को रौशन करते हैं।
(ख्‍़वाजा ग़रीबनवाज़ र.अ.)
ख़ुद तो मिट लूं, उन के पाने की नहीं मुश्किल मुझे। इश्क़ की गर्मी से पैदा, दिल में होगी जब ख़लिश, खिंच लेगी अपनी जानिब, देखना मंजि़ल मुझे।
ख़ुद तो मिट लूं, उन के पाने की नहीं मुश्किल मुझे। इश्क़ की गर्मी से पैदा, दिल में होगी जब ख़लिश, खिंच लेगी अपनी जानिब, देखना मंजि़ल मुझे।
(हज़रत जलालुद्दीन खि़ज्र रूमी र.अ.)
जो ख़ुदा की हमनशीनी इख्तियार करना चाहता है, तो उसे कह दो कि वो सूफियों के पास बैठे।
जो ख़ुदा की हमनशीनी इख्तियार करना चाहता है, तो उसे कह दो कि वो सूफियों के पास बैठे।
(हज़रत मौलाना जलालुद्दीन रूमी र.अ.)

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लज़्ज़ते याद

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घमंड, गुनाह से बढ़कर

घमंड, गुनाह से बढ़कर

मुरीद होना (बैअ़त होना)

मुरीद होना (बैअ़त होना)

उम्र चार साल

उम्र चार साल

महफि़ले सिमा – 2

महफि़ले सिमा – 2

अशरफ़े अंबिया…

अशरफ़े अंबिया…

ताजवाला मेरा सनम है

ताजवाला मेरा सनम है

ख़्वाजा ग़रीबनवाज़ؓ  का नसब नामा

ख़्वाजा ग़रीबनवाज़ؓ का नसब नामा

फ़रमाने पीर

फ़रमाने पीर

तौबा और अस्तग़फ़ार

तौबा और अस्तग़फ़ार

मसलके दाता गंजबख़्शؓ

मसलके दाता गंजबख़्शؓ

शरीअ़त तरीक़त हक़ीक़त मारफ़त

शरीअ़त तरीक़त हक़ीक़त मारफ़त

हदीसे जिब्रईलؑ

हदीसे जिब्रईलؑ

इश्क़ (दर्से मसनवी)

इश्क़ (दर्से मसनवी)

ज़िक्र अज़कार

ज़िक्र अज़कार

छाप तिलक सब छीनी रे

छाप तिलक सब छीनी रे

ईश्वर के अस्त्र-शस्त्र – Bible

ईश्वर के अस्त्र-शस्त्र – Bible

सबका ख़ुदा एक है…

सबका ख़ुदा एक है…

मज़हब नहीं सिखाता…

मज़हब नहीं सिखाता…

दरूद सलाम

दरूद सलाम

ये ज़मीं जब न थी…

ये ज़मीं जब न थी…

दुनिया की ज़िन्दगी तो बस खेल तमाशा है…

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2nd सूफ़ीयाना मैगज़ीन शाया हुई

2nd सूफ़ीयाना मैगज़ीन शाया हुई

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग

ह. अबुबक्र सिददीक़ रज़ी. और तसव्वुफ

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महफिल ए समा – 1

महफिल ए समा – 1

किरपा करो सरकार…

किरपा करो सरकार…

मुरीद का मतलब क्‍या?

मुरीद का मतलब क्‍या?

हज़रत राबिया बसरी

हज़रत राबिया बसरी

चार तरकी ताज

चार तरकी ताज

दुआ (Prayer)

दुआ (Prayer)

अक्लमंद इन्सान – शेख़ सादी

अक्लमंद इन्सान – शेख़ सादी

बारिश की बूंद – शेख़ सादी

बारिश की बूंद – शेख़ सादी

फ़ना व बक़ा – मौलाना जामी

फ़ना व बक़ा – मौलाना जामी

एक वली एक रूई – मौलाना जामी

एक वली एक रूई – मौलाना जामी

तसवफ़ – तसव्‍वुफ़ क्‍या है?

तसवफ़ – तसव्‍वुफ़ क्‍या है?

नमाज़ ए इश्क़

नमाज़ ए इश्क़

खुदा का ज़िक्र

खुदा का ज़िक्र

मी रक़्सम

मी रक़्सम

तलब (मसनवी मौलाना रूमी)

तलब (मसनवी मौलाना रूमी)

अंधेरे से उजाले की ओर…

अंधेरे से उजाले की ओर…

पैगम्बर मुहम्मद ﷺ और फ़क़ीरी

पैगम्बर मुहम्मद ﷺ और फ़क़ीरी

हम्दो सना

हम्दो सना

राहे हक़ में कोशिश – Editor

राहे हक़ में कोशिश – Editor

1st सूफ़ीयाना मैगजीन शाया हुई

1st सूफ़ीयाना मैगजीन शाया हुई

Aai Naseem koye Muhammad – Naat

Guftam ke Roshan

FLASH QURAN Read Online

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Khuda Kare Mujhe Har Dam Tera Khayal Rahe

मुर्शिद से इश्क लड़ा कर तो देखो

Man Kunto Maula (Sufiyana Kalam)

संत कबीर के दोहे Saint Kabir ke Dohe

तुम दीन दयाल हो मनमोहन… Tum Deen Dayal ho Man Mohan…

Colors of Sufism...

अगर तुम शुक्र अदा करोगे तो मैं तुम पर नेमअतों की बारिश कर दूंगा… (कुरान 14:7)
शुक्र से रब राज़ी होता है। और जब वो राज़ी हो जाए तो फिर आप जो चाहें वो आपका हो जाए। पहले जो मांगना हैं
जो शख्स अल्लाह से अपनी हाजत का सवाल नहीं करता, अल्लाह का उस पे गज़ब होता है। (यानी दुआ नहीं करने वाले से ख़ुदा नाराज़ होता है।)
जो चाहता है कि मुसीबत व परेशानी के वक्त उसकी दुआ कुबूल हो तो उसे चाहिए कि आराम व फ़राख़ी के वक्त दुआ क
सब्र करना बेहतर अमल है और ये वही कर सकता है जो दूसरों से बेहतर है। छोटा और कमज़ोर इन्सान सब्र नहीं कर सकता।
बेशक ख़ुदा सब्र करनेवालों के साथ है। (क़ुरान 2:153) सब्र से ही तो इन्सान की पहचान होती है। पत्थर आज़मा
उम्मीद में अपना कुछ नहीं है, कोई आमाल नहीं, कोई घमंड नहीं, जो है उसी का है, बख्‍श दे तो उसकी बख्शिश, रहम कर दे तो उसकी रहमत।
हुज़ूरﷺ फ़रमाते हैं कि ख़ुदा फ़रमाता है. मैं वैसा ही हूं, जैसा मेरा बंदा मेरे बारे में सोचता है। जब भ
बेशक अल्लाह के नज़दीक तुममे से ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है, जो (अल्लाह से) ज़्यादा डरनेवाला है। (क़ुरान 49:13)
जो बंदा अल्लाह के अलावा किसी और शय से डरता है तो अल्लाह उस पर रहमत व बरकत का दरवाज़ा बंद कर देता है औ
मोमीन अपने (छोटे से) गुनाह को ऐसा समझता है, मानो पहाड़ टूट पड़ा हो और मुनाफि़क अपने (बड़े) गुनाह को एक मक्खी की तरह (मामूली) समझता है।
अवाम की तौबा गुनाह से होती है और खास की तौबा ग़फ़लत से। ग़फ़लत वो नींद है, जो हमें मालूम ही नहीं होता
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Testimonials

पंडित रामनारायण शर्मा, पटना

बिलासपुर स्टेशन में हमें ये पत्रिका मिली। हम इसका नाम देखकर आकर्षित हुए। और जब इसे पढ़ने लगे तो पढ़ते ही गए। आपका सहृदय धन्यवाद। जो बातें इसमें दी गई हैं, उसकी सत्यता में किसी को कोई संदेह नहीं हो सकता। लेकिन फिर भी ये समझ नहीं आता कि ऐसी बातें हमारे ‘ज्ञानी’ लोग क्यों नहीं बताते? ये तो उनके ज्ञान पर

अबूल फ़तह सय्यद शाह हसन शब्बीर मुहम्मद.अल.हुसैनी, सज्जादा नशीन, रौज़ा मुनव्वरा ख़ुर्द, गुलबर्गा (कर्नाटक)

या बंदानवाज़! तारीख, जि़न्दगी का एक ऐसा हिस्सा है जिसके बिना इन्सान अधूरा है और इसे महफ़ूज़ रखना हर औलादे आदम पर फ़र्ज़ है। चाहे वो लिखनेवाला हो या फिर पढ़नेवाला, ये हर किसी की जि़म्मेदारी है कि अपनी तारीख़ (व तहज़ीब) को संभाले और अपनी आने वाली नस्लों तक पहुंचाए। क्योंकि आज के ज़माने में हर ज़र्रे को तारी

सूफ़ी सिकंदर शाह चिश्ती, इलाहाबाद (यू.पी.)

सूफ़ीयाना रिसाला, इस बात की तस्दीक़ है कि आप पर बुजूर्गों का खास फ़ैज़ान और करम जारी हो चुका है। बगैर बुजूर्गों की अता के इतना आला दर्जे का काम नहीं हो सकता। कई सौ साल पहले, हमारे कुछ बुजूर्ग, तसव्वुफ़ पर रिसाला निकाला करते थे। लेकिन आज बड़ी बड़ी खानकाहों में भी ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है, जबकि आज इसकी

अवधेश शर्मा शास्त्री, नई दिल्ली

मैंने ऐसी पत्रिका की कल्पना भी नहीं की थी, जैसी आपने प्रकाशित की है। धन्य हैं आप और आपकी सोच, जिसने अध्यात्म को इतने सुंदरता से प्रस्तुत किया है। सिर्फ एक अनुरोध है कि इसके कठीन उर्दू शब्द को हटाकर, आसान बोलचाल वाले शब्द दें या फिर मतलब भी साथ में दें।

इस्हाक़ बिन इस्माईल चिश्ती (बी.ई.), सज्जादा नशीन ख़्वाजा ग़रीबनवाज़, अजमेर

सूफ़ी याना रिसाला मिला, पहला ही शुमारा इतना अच्छा पेश किया गया कि दिल से पुरखुलूस दुआ निकलती है। ‘सूफ़ीयाना’ टाईटल ही इसके अंदर का हाल बयान करता है। रिसाले के मज़ामीन बहुत उम्दा और बेहतरीन है, जिनको पढ़कर लोगों के दिलों में सिराते मुस्तक़ीम पर चलने की ख़्वाहीश जाग उठेगी। मैं सिदक़े दिल से अल्लाह से दुआ क

मौलाना फ़ैज़ान रिज़वी, बरेली (उत्तर प्रदेश)

इल्मे ज़ाहिर व इल्मे बातिन में जो खाई, बनी उमय्या के दौर ने पैदा की गई थी, वो आज तक बनी हुई है। इस खाई को भरने में आपकी ‘सूफ़ीयाना’ की शक़्ल में ऐसी कोशिश, काबिले तारीफ़ है। अल्लाह, अपने रसूल के सदक़े आपको तरक़्की अता फ़रमाए और आने वाली रूकावटों को दूर करे।

SUNNI-LIVE Aulia-e-Hind Kgn786 Hz. Fazle Rehman Syed Mira Ali Datar Int' Sufi Sunni Forum Sunni-Hanfi.org

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Seerat Fakhrul Arefin
17 June 2017
Sarkar Ghaus e Azam
1 February 2017
सरकारे ग़ौसे आज़मؓ ग़ौसे आज़मؓ बमने बेसरो सामां मददे किबलए दीं मददे काबाए ईंमां मददे सरकारे ग़ौसे आज़म, नज़रे करम खुदारा। मेरा खाली क़ासा भर दो, मैं फ़
अच्छे विचार उजाले की तरह हैं।
2 January 2017
हर चीज़ पहले विचार के रूप में होती है। फिर उसे सींचा जाता है, तपाया जाता है तो वो हक़ीक़त होकर सामने आती है। बिल्कुल वैसे ही जैसे सोना को आग में तपाकर ताज बनाया

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